कलयुग का यह काल

कृपाचार्य ने जब अर्जुन के साथ कर्ण के युद्ध पर सवाल उठाए थे तब दुर्योधन ने कर्ण को अंगेश बनाकर न केवल कृपाचार्य के सवालों का जवाब दिया बल्कि आजीवन कर्ण को अपना ॠणी बनाया। कर्ण और दुर्योधन की दोस्ती की नींव डली ।

महाभारत काल में यह एक महत्वपूर्ण और निर्णायक मोड़ है।

कलयुग का यह काल भी महत्वपूर्ण और निर्णायक मोड़ पर खड़ा है। भारत ही नहींबल्कि संपूर्ण विश्व बदलाव के कगार पर है चाहे वह बदलाव आर्थिक हो ,राजनैतिक हो या सांस्कृतिक हो|

 इतिहास के पन्नों को पलटें तो 1979 -से 1989 का समय,  यह वह समय था जब अफगानिस्तान पर आक्रमण के बाद  USSR ने तालिबान को एक आतंकी संगठन बनाने हेतु बीजारोपण किया| 1989 में  शनि, मंगल और गुरु ने एक खास सम्बन्ध बनाया| इस सम्बन्ध के बनते ही पहला  बड़ा राजनैतिक परिवर्तन USSR के भंग होने के रूप में सामने आया| इसके बाद जो दूसरा बड़ा बदलाव आया वह था रूस का बनना, रूस और तालिबान के बीच दुश्मनी का बढ़ना और तीसरा बदलाव अमेरिका और तालिबान के बीच नजदीकी सम्बन्ध के बनने के रूप में आया|

समय चक्र बदला| शनि और गुरु के साथ राहु ने अपनी नज़दीकी बनाई और विश्व राजनीति में एक नया  अध्याय लिखा जाने लगा| Twin Tower पर हमले के बाद तालिबान और अमेरिका के बीच दुश्मनी की शुरुआत हुई| अमेरिका ISIS को प्रश्रय देने लगा|

ISIS को रोकने के लिए रूस, तालिबान के नज़दीक जाने लगा| जिस रूस ने इसे कट्टर आतंकवादी संगठन करार दिया था, उसी रूस ने अब इसे उग्र सुधारवादी कहना प्रारंभ किया||

5 अक्टूबर 2018 में मैंने अपने ज्योतिषीय आलेख में लिखा था कि ग्रहों के संकेत के अनुसार भारत ही नहीं वरन संपूर्ण विश्व बदलाव के मुहाने पर खड़ा है| कोई भी घटना रातों रात नहीं होती| 2018 में जिस घटनाक्रम की नींव डाली गयी उसे फलीभूत होते हुए हम सब देख रहे हैं|

एक ऐसा बदलाव जो शताब्दियों में एक बार होता है| न सिर्फ देश में अंदरूनी बदलाव हो रहे हैं बल्कि सत्ता का विकेन्द्रीकरण भी हो रहा है| विश्व राजनीति में Paradigm Shift का संकेत मिल रहा है| एक के बाद एक लगातार हर फ्रंट पर कई  बदलाव महसूस किये रहे हैं |

फिलहाल गुरु वक्री होकर एक बार फिर मकर राशि में प्रवेश को उद्धत है| 6 सितंबर को मंगल का कन्या राशि में प्रवेश और शुक्र का अपनी ही राशि तुला राशि में प्रवेश होगा| शुक्र की उग्रता बनी हुई है और ऐसे में इसे गुरु, शनि और केतु का गुप्त साथ तो  मिल ही रहा है साथ ही साथ सूर्य, चंद्र, मंगल और बुध का भी गुप्त समर्थन मिल रहा है| इन सबके बीच भादो के महीने में बुध का हस्त नक्षत्र में गोचर; मंगल, गुरु का राशि परिवर्तन और जनवरी 2022 तक शुक्र की उग्रता बने रहना, आने वाले छह महीने में क्या संकेत दे रहे हैं –

राजनैतिक संकेत –

वैश्विक स्तर पर राजनैतिक अस्थिरता बनी रहेगी| अफगानिस्तान का परिदृश्य बदलाव के कई रंग देखेगा|  जिहादी और उनके संरक्षकों की दोहरी नीति जारी रहेगी|

अप्रवासन की समस्या –

अक्टूबर माह में गुरु, शनि के साथ  मकर राशि में तो होगा लेकिन शनि के पास नहीं होगा| दिखने में वह मंगल के साथ नहीं दिखेगा लेकिन वह मंगल के पास होगा| गुरु और मंगल का एक दूसरे के इतना पास होना, आने वाले छह महीनों में अफगानिस्तान से लोगों के पलायन करके दूसरे जगह जाना और इस वजह से अप्रवासन का गंभीर संकट पैदा होने का संकेत दे रहे हैं| EU के कई राजनेता यह वायदा कर चुके हैं कि 2015 की तरह अब अप्रवासन की समस्या नहीं पैदा होगी| लेकिन ग्रहों के संचार को देखते हुए ऐसा प्रतीत हो रहा है कि उनके वायदे कोरे वायदे ही बनकर रह जायेंगे| ऐसे में यूरोप की जनता अपने को ठगा हुआ महसूस करेगी| ऐसा अराजक माहौल तैयार होगा जो पहले कभी नहीं तैयार हुआ था| 

राहु की दशा और ग्रहों का एक दूसरे से पल पल बदलता गठजोड़; विश्व के सामने अमेरिका को अपनी साख को बनाये रखना कठिन होगा| अमेरिका अब खुद पर ज्यादा ध्यान देगा| विश्व के अन्य भागों के साथ उसके संबंधों की प्रगाढ़ता में कमी आएगी|

रूस, अमेरिका, ISIS और तालिबान के इस खेल में उलझने का समय भारत के पास नहीं है| अफगानिस्तान के अस्थिरता के बीच पाकिस्तान, भारत पर हमले का दिवास्वप्न देख रहा है| भारत को पाकिस्तान की तरफ से सचेत और सावधान रहने की जरूरत है| देश में आतंकी हमलों की पुरजोर कोशिश कर सकता  है|

भारत शनैः शनैः संपूर्ण विश्व में अपनी उपस्थिति दर्ज करवाएगा| कुछ गलतियां भी करेगा लेकिन उसे अपने आप से सही कर लेगा और अपनी गलती से सीख लेकर आगे बढ़ेगा न कि अमेरिका की तरह कहेगा कि हमने गलती की इसलिए हम वापस जा रहे हैं| भारत के कद में  वैश्विक पटल पर,सशक्त एवं शक्तिशाली सेना की मदद से, भू-राजनैतिक की गहरी समझ एवं सूझ-बूझ से तथा साहस के साथ आतंकबाद का मुकाबला करने की अदम्य क्षमता से, बट वृक्ष की तरह चहुँ दिश फैलाव होगा| लेकिन भारत की कुंडली में षष्ठेश शुक्र,सप्तम भाव में बैठे केतु, षष्ठेश के साथ अंशात्मक नजदीकी में बैठा सूर्य और शनि तथा छठे भाव में बैठा बृहस्पति, अपनी चाक चौबंद  तैयारी के बावजूद सीमा पर चौकन्ना होने के संकेत दे रहे हैं|

बिहार, बंगाल, उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश और पंजाब में नाना प्रकार के उपद्रव होंगे|

महामारी का प्रकोप-

सितंबर माह में मंगल के कन्या राशि में गोचर के बाद से महामारी के प्रकोप में तेजी आना चिंता का विषय है| हाँ सबलोग सरकार द्वारा जारी दिशा निर्देशों के साथ साथ स्वयं भी सफाई के मूलभूत बातों का ध्यान रखेंगे तो हो सकता है कि इसकी भयावहता में कमी आ जाये वर्ना तो… यह एक बड़ा संकट है||

प्राकृतिक उत्पात –

पहले से ही रुष्ट प्रकृति के प्रसन्न होने की फिलहाल संभावना नहीं है| सितम्बर माह के पहले सप्ताह में हवाओं द्वारा बनने वाले दवाबपूर्ण स्थिति से एक बार फिर देश के उत्तरी पूर्वी हिस्सों में जल प्रलय की स्थिति तैयार होगी| अक्टूबर माह और प्राकृतिक उत्पात के बारे मैं मैं पहले भी लिख चुकी हूँ अतिबृष्टि से कुछ और हिस्सों में बाढ़ की स्थिति गंभीर होगी| भूकंप की स्थिति भी बनेगी|

जलवायु परिवर्तन-

आगे दिसंबर, जनवरी’2022 माह में शुक्र और गुरु का शीघ्रगामी होकर चंद्र और मंगल के नजदीक आना जलवायु परिवर्तन एक गंभीर समस्या के रूप में उभरेगा इसका संकेत मिल रहा है| हम देश में आपातकाल की चर्चा करते हैं लेकिन आने वाला माह जलवायु आपातकाल का होगा| यह एक ऐसा संकट है जिसके उबरने हेतु कोई वैक्सीन नहीं है| किसी भी जलवायु वैज्ञानिक के सोच से कहीं ज्यादा और तेजी से जलवायु परिवर्तन होगा|

अगर समय रहते हम सब नहीं चेते तो वर्ष 2030 एक ऐसा वर्ष होगा जब सम्पूर्ण विश्व में हाहाकार मच जायेगा|

जो देश जलवायु परिवर्तन पर दृढ संकल्प शक्ति के साथ कार्य करेगा, प्रकृति से प्रेम करेगा वह देश आने वाले समय में विश्व पर राज करेगा|

और जब बात प्रेम की हो तो भारत से बेहतर इसे कौन कर सकता है| इसलिए आने वाले दस वर्षों में विश्व का सिरमौर बनने हेतु भारत के पास सुनहरा अवसर है जिसे भारत की आगे आने वाली मंगल की दशा भी अपना समर्थन दे रहा है|