अफ़ग़ानिस्तान पर तालिबानियों के कब्जे का भारत पर प्रभाव

17 अगस्त को अफ़ग़ानिस्तान पर तालिबानी कब्जे के बाद पहली बार उनके प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने प्रेस कांफ्रेंस के जरिये विश्व से संवाद स्थापित किया| बात का सार यह था कि जो कोई भी इस्लाम के नियम से चलेगा उसे यहाँ कोई परेशानी नहीं होगी|लोगों के जीवन जीने का ढंग, रहन-सहन सब उनकी धार्मिक आस्थाओं के अनुरूप होंगे| वे जो कहें, वो ठीक बाकी सब शरीयत के खिलाफ होगा|

17 अगस्त को ही प्रधानमंत्री माननीय नरेंद्र मोदी जी ने एक उच्च स्तरीय बैठक कर के अफ़ग़ानिस्तान स्थिति की समीक्षा की| इस बैठक में गृह मंत्री अमित शाह जी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह जी, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल जी, विदेश सचिव हर्षवर्धन जी और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण जी शामिल हुईं|

इस गहमा-गहमी के बीच 17 अगस्त को ही सूर्य ने भी अपनी राशि, सिंह राशि में प्रवेश किया और जनसमूह के कारक शनि के साथ 6 / 8  का सम्बन्ध स्थापित किया| शनि मृत्युभाग में है जहाँ उसे राहु का समर्थन मिल रहा है| राहु भी मृत्युभाग में है| गूढ़ राजनीति के जानकार, महिलाओं और कलाकारों का कारक शुक्र का , शनि (जनसमूह), मंगल (आक्रामकता, हिंसा, तर्क और कुशल रणनीतिकार) और राहु ( कूटनैतिक विशेषज्ञ, छल, भ्रम) के साथ नजदीकी सम्बन्ध बनाना और ऐसे में गुरु का केतु और सूर्य से वार्तालाप कुछ नकारात्मक और कुछ सकारात्मक, दोनों प्रकार का संकेत दे रहे हैं|

इतनी तेजी से बदल रहे घटना चक्र के बीच जो सवाल स्वाभाविक रूप से मन आता है, वह है– Is this uncertainty representative of CERTAINTY??

The Newyork Times में मार्क एवं जूलियन के आलेख के अनुसार, यदि अमेरिका इस क्षेत्र से निकल जाता है तो चीन को रोकने का उसका सपना अधूरा रह जायेगा और खेल ख़त्म हो जायेगा|

क्या सच में खेल ख़त्म होगा या एक नए खेल की शुरुआत होगी इसके लिए हमें हर पल बदलते हुए ग्रहों पर अपनी नजर बनाके रखनी होगी|

ग्रहों के संकेत के अनुसार : इंतज़ार कीजिये अप्रैल 2022 का|

खैर आने वाले समय में अफ़ग़ानिस्तान विश्व के महाशक्तियों का अखाड़ा बन सकता है| ऐसे हालात में सबसे ज्यादा नुकसान किसे होगा?? भारत, चीन, रूस, अमेरिका या पाकिस्तान.. इस पर चर्चा होनी चाहिए|

इन सबके बीच ज्योतिष के नज़रिये से देखेंगे कि अपने देश भारत के लिए ग्रहों के क्या सन्देश हैं|

हम सब जानते हैं कि ज्योतिष कभी भी एकांगी होकर बात नहीं करता है| कोई एक सूत्रीय फार्मूला नहीं देता है| बहुत सारे बिंदुओं की जब तक सूक्ष्म विश्लेषण नहीं करता है तब तक कुछ नहीं कहता है| कई बिंदुओं के समायोजन से ही फलादेश करता है| इसलिए ग्रहों के सन्देश को समझने हेतु हमें इनके इस गठबंधन के अलावा अपने देश की वर्तमान दशा तो देखनी ही होगी इसके साथ कुछ अन्य ज्योतिषीय साधनों अवं उपकरणों के द्वारा भी वस्तुस्थिति की जांच करनी होगी|

ग्रहों की पल पल बदलती स्थिति, देश की दशा और सिंहासन चक्र के माध्यम से वर्तमान स्थिति का एक आकलन, भारत के संदर्भ में –

16 सितम्बर तक भारत की विंशोत्तरी दशा रहेगी चंद्र/ बुध/ बुध की|

सिंहासन चक्र में 31 अगस्त तक सिंह में बुध का शनि राहु और मंगल के साथ होगा और आधार में चंद्र का केतु के साथ  होगा|

शनि का चंद्र के नक्षत्र में होना और चंद्र का शनि के नक्षत्र में होकर केतु के साथ होना और आधार में अवस्थित होना अच्छी स्थिति नहीं है|

 एक सितम्बर को मंगल का प्रवेश होगा उत्तरफाल्गुनी नक्षत्र में और इस नक्षत्र में प्रवेश के साथ ही इसका प्रवेश सिंहासन में भी हो जायेगा| वहां जाकर शुक्र के साथ इसका खास संवाद स्थापित होगा|

 14 सितम्बर को गुरु एक बार फिर मकर राशि में शनि के साथ हो जायेगा और सूर्य उत्तर फाल्गुनी में प्रवेश के साथ मंगल और शुक्र के साथ हो लेगा|

यहाँ तक स्थिति विकट तो है पर नियंत्रण में है|

21 सितम्बर को पक्ष भी बदलेगा और भारत की दशा भी बदली हुई होगी|

चंद्र/ बुध/ केतु की दशा रहेगी|

दशमांश कुंडली में केतु छठे भाव में मंगल के साथ बैठा है|

बदलता हुआ पक्ष, बदली हुई दशा और सिंहासन चक्र में ग्रहों की स्थिति के अनुसार : –

1 – अफ़ग़ानिस्तान मामले में- खुल के तो नहीं, पर परदे के पीछे से भारत, वर्तमान शासक और उनके गुटों  को अपना समर्थन देगा|

2 – लगभग 20 / 25 दिनों का इंतज़ार और, भारत अपनी आक्रामक कूटनीति और सामरिक नीतियों से विश्व को चकित करेगा|

3 – दक्षिण एशिया के एक सशक्त खिलाड़ी के रूप में भारत का अभ्युदय आरम्भ होगा|

4 – अंतर्राष्ट्रीय मंच पर जहाँ भारत सशक्त होगा वहीं आंतरिक रूप से अशक्त होगा| राज्यों के बीच सीमा विवाद और हिंसक झड़पें सरकार के लिए चिंता का विषय रहेगा|

5 –भारत द्वारा किसी गुट को मदद दिए जाने से भारत के विरुद्ध कुछ और दुश्मन खड़े होंगे| इन दुश्मनों को पाकिस्तान और चीन का समर्थन मिलेगा| इसके परिणामस्वरूप युद्ध की आग देश के आँगन में पहुंचेगी|देश को गृह युद्ध की आग में झोंके जाने का पुरजोर प्रयास होगा|

6 – अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर देशों के वरीयता क्रम में जहाँ एक ओर विश्व, खुद को महाशक्ति कहे जाने वाले देश का लड़खड़ाना देखेगा वहीं दूसरी तरफ भारत का अभ्युदय देखेगा| नया भारत, सुदृढ़ और सशक्त भारत|