सूर्य और चंद्र का महत्व

किसी भी व्यक्ति की कुंडली का ज्योतिषीय  विश्लेषण करना हो या प्रकृति का ज्योतिषीय विश्लेषण करना हो तो सर्वप्रथम सूर्य और चंद्र का सूक्ष्मता से विश्लेषण किया जाता है| ज्योतिषशास्त्र में  आखिर नौ ग्रहों में सबसे पहले इन दोनों का विश्लेषण ही क्यों किया जाता है?? इन दोनों का क्या है महत्व?? संसार और शरीर के साथ ये किस प्रकार गुंथे हुए हैं?? जानने हेतु बहुत सारे बिंदुओं में से कुछ बिंदुओं को मैंने सरल शब्दों में प्रस्तुत करने की एक कोशिश की है| आइये चलें सूर्य और चाँद के पास, सूर्य और चाँद के साथ और ज्योतिष के नजरिये से जानें कि ये क्यों इतने महत्वपूर्ण हैं|

1 – नौ ग्रहों में सबसे तेज चाल की वजह से जीवन यात्रा का मार्ग सुगम होगा या दुर्गम इसकी जानकारी चंद्र अन्य ग्रहों को एक कुशल मार्गदर्शक की तरह दे पाता है| मार्ग की स्थिति की पूर्व सूचना मिल जाने की वजह से व्यक्ति उसी प्रकार की तैयारियों के साथ जीवन यात्रा  की शुरुआत करता है और भविष्य को आनंदमय बना पता है||

2 – वर्षों वर्षों के कर्मों के लेखा जोखा की गठरी को अपनी पीठ पर लाद कर सूर्य चलता है लेकिन उन कर्मों का फल, कब, कितना, किसे और कैसे देना है यह कार्य करता है चंद्र|

3 – मष्तिष्क का दायाँ हिस्सा है सूर्य और बायाँ हिस्सा है चंद्र|

4 –  गर्मी है सूर्य तो शीतलता है चंद्र |

5 – अहंकार है सूर्य तो प्रेम है चंद्र|

6 – शुष्क है सूर्य तो रस है चंद्र|

7 – भरोसा है सूर्य तो छल है चंद्र|

8 – गुणात्मक विकास है सूर्य तो भावनात्मक विकास है चंद्र|

9 – संरक्षण है सूर्य तो सौंदर्यीकरण है चंद्र 

10 – खाद्यान्नों की उपज के लिए सूर्य की जरूरत है तो उसे पुष्ट करने के लिए चंद्र चाहिए|

11 – अनाज की उत्पत्ति के लिए सूर्य चाहिए लकिन उनमें औषधीय गुण उत्पन्न करने हेतु चंद्र चाहिए|

12 – इन्द्रियों के माध्यम से किसी भी वस्तु को जब हम देखते हैं तो क्या वह वस्तु वैसी ही होती है जैसा कि हमने आँख, कान,नाक, मुख और त्वचा के माध्यम से उसे महसूस किया या कुछ और ?

कोई भी वस्तु हमें वैसी दिखती है जैसा हमें चंद्र दिखाता है| अर्थात इसका अर्थ यह हुआ कि अगर हम कहते हैं  कि यह लाल रंग है तो ऐसा इसलिए कि चंद्र ने उसे ऐसा देखा| हो सकता है वास्तव में उसका रंग कुछ और हो|तभी तो कहते हैं कि यह संसार भ्रम  है | चंद्र जिस तरह की सूचना सूर्य के पास पहुँचाता है, सूर्य उसपर आंख मूँद कर भरोसा करता है और उसे ही प्रतिबिंबित करता है| इन्द्रियों का सूर्य का पास सीधा सीधा पहुँच असंभव है| सूर्य और इन्द्रियों के बीच की कड़ी है चंद्र|

13 – आत्मा है सूर्य परन्तु जब तक इसे शरीर नहीं मिलता तब तक यह आत्मा महत्वहीन है| आत्मा को शरीर मिले यह तय करता है चंद्र|

मृत्यु के समय समस्त  इन्द्रियों का लय चंद्र में हो जाता है एवं  तमाम इन्द्रियों के साथ चंद्र, सूर्य में लीन हो जाता है| मृत्यु पश्चात् नव जीवन के निर्माण हेतु, नव चेतना के संचार हेतु, मन्त्रों के निर्माण हेतु, जीवन में आनंद हेतु सूर्य और चंद्र का आपसी तालमेल  होना अति आवश्यक है|

जन्म कुंडली में एवं नवांश कुंडली में सूर्य और चंद्र के आपसी तालमेल का सूक्ष्मता से विश्लेषण, बहुत ही खूबसूरती से न सिर्फ  हमारे सम्पूर्ण  जीवन यात्रा का अपितु मृत्यु पर्यन्त भी ऊर्जा के रूपांतरण का स्पष्ट खाका खींच के रख देता है| जीवन से पहले, जीवन में और जीवन के बाद की गति का सटीक मार्गदर्शन करने की वजह से ज्योतिष में इन दोनों की इतनी महत्ता है|

उसी प्रकार प्रकृति की घटनाओं का सटीक चित्रण समय से पूर्व करने की वजह से इन दोनों को महत्वपूर्ण माना गया है|